Wednesday, 24 June 2015

जीते जी मिले या मरने के बाद ,मिलता है हर कर्म का फल ....

Posted by- radiateashok
जीते जी मिले या मरने के बाद  ,मिलता है हर कर्म का फल ....



यह एक ऑटोमेटिक प्रक्रिया है – जैसी करनी वैसे फल , आज नहीं निश्चय कल | दुष्कर्म करके उसके दंड से नहीं बचा जा सकता | जिस प्रकार सत्कर्मो का अच्छा फल मिलता है , उसी प्रकार अपराधो के लिए सजा अवश्य मिलती है |
समय लग सकता है | आज का फल आज मिलने से व्यक्ति भ्रम में पद सकता है और यह सोच सकता है की बुरे कर्म के दंड से बाख गए या भला कर्म निष्फल चला गया , पर वस्तुतः ऐसा होता कभी नहीं | तुरंत या कालान्तर में इसका फल अवश्य मिलता है | परन्तु फल का यह रहस्य अज्ञात होने के कारण प्रत्यक्षवादी , उतावले , अनास्थावान हो उठते है | पर यदि धेर्य रखा जाये तो प्रतीत होगा की इसी जन्म में अथवा अगले जन्म में प्रत्येक कर्म का भला – बुरा परिणाम मिलना सुनिश्चित है | उसी व्यवस्था क्रम पर तो यह विश्व टिका है | यदि यह असदिघ्द हो जाये तो फिर ऐसा अंधेर फेले , ऐसी अराजकता उपजे की कही कुछ संभलना – संभालना संभव न हो सके | फिर न कोई पाप से डरे और न पुण्य का झंझट और न कोई नुकसान |

पापी की अन्तरात्मा

द्रष्टिकोण अपने आप में चित की प्रसन्नता – अप्रसन्नता , संतोष , शांति  अशांति बनकर पग- पग पर फलित होता रहता है | सत्कर्म करने पर मन में अनायास ही संतोष और उल्लास उठता रहता है किसी कष्ट पीड़ित की सहायता अपना काम हर्ज करके यदि कर दी जाये तो भीतर ही भीतर एक परम सात्विक हल्का और शीतल मलयज पवन जैसा आनंद उठता अनुभव होगा | इसके विपरीत यदि चोरी , ठगी ,अनीति बरतकर किसी को हानी पहुंचाई होगी तो भीतर ही भीतर कोई खटमल , पिस्सू की तरह कट रहा होगा और आत्मग्लानी से अंत : करण में उद्देग बढ़ रहा होगा |
युवती को देखने की द्रष्टि कैसी है 


जो हर युवती को अपनी पुत्री की तरह देख सके , पराये पैसे को ठीकरी जैसा समझे , अपने स्वलप  उपार्जन से सादगी का जीवन जीते हुए संतुष्ट रहे , चरित्र उज्जवल रखे और दुसरो के प्रति स्नेह सहयोग भरा द्रष्टिकोण रखे , उसे निरंतर अपने भीतर एक अमृत जैसी निझर्रिणी कल – कल ध्वनी से प्रवाहित होती हुई अनुभव होगी और लगेगा की भावना छेत्र अलोकिक सुषमा ही प्राद्भूर्त हो रही है | मरने के बाद भी भले – बुरे कर्मो के दंड कितने ही प्रकार से मिलते होंगे | दो जन्मो के बिच सुखद और कष्टकर स्थति रहती होगी | 

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Monday, 22 June 2015

थोड़ी आजादी थोड़ा अनुशाशन

Posted by- radiateashok
थोड़ी आजादी थोड़ा अनुशाशन

समय के साथ बच्चो की परवरिश चुनोतिपूर्ण होती जा रही है | माता - पिता के लिए यह तय कर पाना मुश्किल हो जाता है की बच्चो की परवरिश कैसे की जाये की उनके व्यक्तित्व का विकाश सही ढंग से हो | अपने मन में उठने वाले ऐसे ही सवालो के जवाब जानने के लिए पढ़े यह लेख ?.....
जरा याद कीजिये की अपने बच्चे के साथ आप पिछली बार कब खिलखिला कर हँसे थे | याद नहीं आ रहा ....आये भी तो कैसे ? महानगरो में रहने वाले ज्यादातर कामकाजी अभिभावकों के पास इतना वक्त ही नहीं होता की वे कभी तनावमुक्त होकर अपने बचे के साथ यु ही बातचीत कर सके | उनके साथ माता – पिता की बातचीत केवल निर्देश देने तक सिमित रह गई है | ऐसे में बच्चो को ऐसा लगता है की पेरेंट्स से बातचीत का मतलब है , डांट सुनना | इसलिए वे पेरेंट्स से कतराने लगते है | बच्चो से दुरी बनाकर उन्हें अनुशासित नहीं किया जा सकता |

जुडाव है जरुरी

जब बच्चे स्कूल जाना शुरू करते है तो उसके बाद से ही उनके व्यक्तित्व का स्वतंत्र विकाश शुरू हो जाता है | घर से बाहर दोस्तों और टीचर्स के साथ उनके अनुभवों की दुनिया विस्तृत होने लगती है  समय की रफ़्तार के साथ आजकल बच्चो का भावनात्मक विकाश भी बहुत तेजी से हो रहा है | इसलिए आजकल नो – दस साल की उम्र से ही उन्हें पर्सनल स्पेस की जरुरत महसूस होने लगती है |पेरेंट्स को उनके व्यवहार में आने वाला यह बदलाव अटपट जरुर लग सकता है , पर ऐसी स्थति में बच्चो पर नाराजगी दिखाने के बजाय धेर्य से काम लेना चाहिए |

आपसी समझ से बनेगी बात

जहाँ बच्चो और पेरेंट्स के बिच सहज सम्बन्ध होते है , वहा उनके व्यक्तित्व का विकाश बेहतर ढंग से होता है | यह न भूले की बड़ो की तरह बच्चो का भी आत्मसम्मान होता है | जिन बातों को हम छोटी समझते है , वे उनके लिए बहुत बड़ी हो सकती है | मिशाल के तोर पर मेहमानों के सामने बच्चे को डांटना , दुसरो से उसकी तुलना करना या हमेशा उसकी खामियों के बारे नमे ही बात करना आदि पेरेंट्स की ऐसी सामान्य आदते है , जिनसे बच्चो का कोमल मन बुरी तरह आहत होता है | उसमे पेरेंट्स के प्रति विद्रोह की भावना पनपने लगती है  | इसलिए हमें सयंत ढंग से अपनी ऐसी आदतों में बदलाव लाने की कोशिश करनी चाहिये |

सीखे गलतियों से   
  
यह एक मनोवेज्ञानिक तथ्य है की अपनी गलतियों में सिखा गया सबक व्यक्ति को ताउम्र याद रहता है | बच्चो के मामले में भी यही बात लागु होती है | इसका मतलब यह नहीं है की आप उन्हें गलतियां करने की खुली छुट दे , पर छोटी – छोटी बातों को लेकर बेवजह रोक-  टोक से बच्चे का आत्मविश्वास कमजोर पड़ने लगता है और कोई भी नया काम शुरू करने से पहले वह हार के बारे में सोचकर नर्वस हो जाता है |

खुलकर बोलने की आजादी

अपने बच्चो को बहुत ज्यादा शिष्टाचार सिखाने की कोशिश में कई बार पेरेंट्स इउनके द्वारा कही गई हर बात को गलत ठहराते हुए उन्हें इतना टोकते है की वे माता – पिता के सामने कुछ भी बोलने से डरने लगते है | उनके आत्मविश्वास की बुनियाद कमजोर पद जाती है | ऐसी स्थति में बच्चो को दुसरो के सामने सही ढंग से बोलने का सलीका जरुर सिखाये , पर खुद उनके साथ अपने संवाद का स्तर इतना सहज रखे की वे खुलकर आपके सामने अपने दिल की बाते कर सके |


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Sunday, 21 June 2015

अगर चला जाये आपके फ़ोन में पानी तो फिर क्या करे पढ़िए इस पूरी पोस्ट को और जानिए कैसे ?

Posted by- radiateashok
अगर चला जाये आपके फ़ोन में पानी


फ़ोन को पानी से सुरक्षित रखने के लिए पुख्ता प्रबंध करने चाहिए | फिर भी गलती से पानी में गिर जाये तो तुरंत बाहर निकालना चाहिये | ज्यादा देर पानी में रहने से फ़ोन स्थाई रूप से फ़ोन ख़राब हो सकता है  | कुछ स्मार्टफोन में वाटरप्रूप कोटिंग भी होती है | इससे वे पानी में कुछ सेकंड्स तक सुरक्षित रहते है
चावल में दबा दे  
फ़ोन के पानी में जाने पर पूरी दुनिया में इस टेक्नोलॉजी को इस्तेमाल करते है | सबसे पहले एक एयरटाइट कंटेनर या जीपलोक बैग ले और इसे कच्चे चावल से भर दे  | फ़ोन को चावल के अंदर रख दे | जीपलोक बैग या एयरटाइट कंटेनर टाइट बंद कर दे | इसे सूखे स्थान पर रखे | आप ओटमील या सिलिका जेल पैक भी इस्तेमाल कर सकते है | 
हिलाकर पानी बाहर निकले
हेडफोन जेक , चार्जिंग पोर्ट और फिजिकल बटन्स के निचे मोजूद पानी को निकालने के लिए आपको फ़ोन को सावधानी से हिलाना चाहिए | इसके बाद आपको सूखे कपडे , टॉयलेट पेपर या पेपर नेपकिन से फ़ोन को आराम से साफ करना चाहिए | इससे फ़ोन में या इसके बाहरी आवरण पर मोजूद पानी की बूंदों को साफ किया जा सकता है |
सब चीज निकाल दे
फ़ोन को स्विच ऑफ करने के बाद फ़ोन से हर चीज को निकालना शुरू करे | आपको फ़ोन की बेटरी , सिम कार्ड , मेमोरी कार्ड आधी को फ़ोन से बाहर निकाल देना चाहिए इससे आप पानी की बूंदों को आसानी से साफ कर सकते है और पानी की बुँदे बचे रहने की गुंजाइश भी काफी हद तक कम हो जाती है
स्विच ऑफ करे
इस बात की पूरी आशंका होती है की जब आपका फ़ोन पानी में गिरा हो तो वह ऑन हो | पानी से निकालते ही फ़ोन को स्विच ऑफ करना चाहिए | अगर फ़ोन को चालू रखेंगे तो शॉर्ट सर्किट की आशंका बनी रहेगी |
सर्विस सेंटर ले जाएँ
पानी में जाने के बाद फ़ोन के सही होने की कोई गारंटी नहीं है | चावल में रखने के बाद भी फ़ोन काम न करे तो इसे कंपनी के सर्विस सेंटर ले जाये | वहां पर फ़ोन को हुए नुकसान के बारे में सही आकलन किया जा सकता है |
कुछ खास तैयारी करे

अगर बरसाती मोसम में सफ़र कर रहे है या समुन्द्र या स्वीमिंग पुल के किनारे पर है तो वाटरप्रूप कैर्री पाउच साथ रखना चाहिए | इसे ई – कॉमर्स साइट से 150 रूपए में खरीद सकते है |  
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Saturday, 20 June 2015

क्या है खुश रहने का राज

Posted by- radiateashok

क्या है खुश रहने का राज

एक समय की बात है, एक गाँव में महान ऋषि रहते थे | लोग उनके पास अपनी कठिनाईयां लेकर आते थे और ऋषि उनका मार्गदर्शन करते थे | एक दिन एक व्यक्ति, ऋषि के पास आया और ऋषि से एक प्रश्न पूछा | उसने ऋषि से पूछा कि गुरुदेव मैं यह जानना चाहता हुईं कि हमेशा खुश रहने का राज़ क्या है (What is the Secret of Happiness)?” ऋषि ने उससे कहा कि तुम मेरे साथ जंगल में चलो, मैं तुम्हे खुश रहने का राज़ (Secret of Happiness) बताता हूँ|
ऐसा कहकर ऋषि और वह व्यक्ति जंगल की तरफ चलने लगे | रास्ते में ऋषि ने एक बड़ा सा पत्थर उठाया और उस व्यक्ति को कह दिया कि इसे पकड़ो और चलो | उस व्यक्ति ने पत्थर को उठाया और वह ऋषि के साथ साथ जंगल की तरफ चलने लगा |
कुछ समय बाद उस व्यक्ति के हाथ में दर्द होने लगा लेकिन वह चुप रहा और चलता रहा | लेकिन जब चलते हुए बहुत समय बीत गया और उस व्यक्ति से दर्द सहा नहीं गया तो उसने ऋषि से कहा कि उसे दर्द हो रहा है | तो ऋषि ने कहा कि इस पत्थर को नीचे रख दो | पत्थर को नीचे रखने पर उस व्यक्ति को बड़ी राहत महसूस हुयी |
तभी ऋषि ने कहा – “यही है खुश रहने का राज़ (Secret of Happiness)”| व्यक्ति ने कहा गुरुवर मैं समझा नहीं|
तो ऋषि ने कहा- जिस तरह इस पत्थर को एक मिनट तक हाथ में रखने पर थोडा सा दर्द होता है और अगर इसे एक घंटे तक हाथ में रखें तो थोडा ज्यादा दर्द होता है और अगर इसे और ज्यादा समय तक उठाये रखेंगे तो दर्द बढ़ता जायेगा उसी तरह दुखों के बोझ को जितने ज्यादा समय तक उठाये रखेंगे उतने ही ज्यादा हम दु:खी और निराश रहेंगे | यह हम पर निर्भर करता है कि हम दुखों के बोझ को एक मिनट तक उठाये रखते है या उसे जिंदगी भर | अगर तुम खुश रहना चाहते हो तो दु:ख रुपी पत्थर को जल्दी से जल्दी नीचे रखना सीख लो और हो सके तो उसे उठाओ ही नहीं
             Read This :- कैसे जलाये रखें अपने अन्दर की चिंगारी को ?


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Friday, 19 June 2015

देता छप्पर फाड़ के

Posted by- radiateashok
देता छप्पर फाड़ के



रामू किसान बहुत ही ईमानदार और भोला – भाला था | वह सदा ही दुसरो की सहायता करने के लिए तैयार रहता था |एक बार की बात है | शाम के समय वह दीर्घ शंका के लिए खेत की और गया | वापसी में वह ज्योही घर की और चला, वैसे ही उसके पैर में एक अरहर की खूंटी गड गई | उसने सोचा, यह किसी और के पैर में गड़े, इससे अच्छा है की इसे उखाड़ दूँ | उसने जोर लगाकर खूंटी को उखाड़ दिया | खूंटी के निचे उसे कुछ सोने की अशर्फिया दिखाई दी | उसके दिमाग में आया, पता नहीं यह किसकी है ? अगर ये मेरे लिए है तो जिस राम ने दिखाया, वह घर भी पहुचायेगा | इसके बाद उसने घर आकर उसने यह बात अपनी पत्नी को बताई | रामू की पत्नी उससे भी भोली थी | उसने यह बात अपने पड़ोसियों को बता दी | पडोसी बड़ा ही घाघ था | रात को जब सभी लोग खा – पीकर सो गए, तो पडोसी ने अपने घर वालो को जगाया और कहा, ‘चलो, हम लोग अशर्फियों को निकाल लेते है |’ पडोसी और उसके घर वाले कुदाल आदि लेकर खेत में पहुँच गए | उन्होंने बताई हुई जगह पर खोदा | सभी अवाक् थे, क्योकि वहां एक नहीं, पांच - पाँच धातु के पात्र थे | पर सब में अशर्फिया नहीं, अपितु बड़े – बड़े पहाड़ी बिच्छु  थे | पडोसी ने कहा, ‘रामू ने हम लोगो  को मारने  की अच्छी योजना बनाई थी | हमें इसका प्रत्तुतर देना ही होगा |’ उसने अपने घर वालो से कहा, ‘पांचो पात्रो को उठाकर ले चलो और रामू का छप्पर फाड़कर इन बिच्छुओ को उसके घर में गिरा दो, ताकि इन बिच्छुओ के काटने से पति – पत्नी की इहलीला समाप्त हो जाये |’ घर वालो ने वैसा ही किया और रामू के छप्पर को फाड़कर बिच्छुओ को उसके घर में गिराने लगे | लेकिन ईश्वर की लीला देखिये | वे सारे बिच्छु घर में गिरते ही अशर्फिया बन गए | सुबह – सुबह रामू उठा तो उसने भगवान को धन्यवाद् दिया और अपनी पत्नी से कहा, ‘देखो ! देने वाला जब भी देता, देता छप्पर फाड़ के |’

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Thursday, 18 June 2015

सुख बाँटने का जरीया है दान

Posted by- radiateashok
सुख बाँटने का जरीया है दान


सर्वे भवन्तु सुखिन : सर्वे सन्तु निरामया ....... सिर्फ एक धारणा नहीं है | यह मूर्त रूप ले सके ,इसके लिए व्यवस्था भी बनाई गई है  | दान उसी व्यवस्था का एक हिस्सा है | कहा जाता है की बांटने से दुःख घटते है , जबकि सुख बढ़ते है | दान सुख की साझेदारी का जरिया है | अगर रुढियो से मुक्त होकर दान की सच्ची अवधारणा को समझा और उस पर अमल  किया जा सके तो यह मनुष्यता के समग्र कल्याण का माध्यम बन सकता है | हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत दोनों में ही दान एक परंपरा के रूप में स्थापित है , जिसकी बड़ी महिमा बताई गई है | माना गया है की सह्दयता और सहायता करने की सोच के साथ किसी जरूरतमंद को कुछ देने का अर्थ ही दान है | अपनी वास्तु पर से अधिकार हटाकर , जिसको दिया जा रहा है उसे उसका स्वामी बना देना दान कहलाता है | यह अधिकार अगर किसी सुपात्र के हिस्से आता है तो देने वाले के मन को संतोष मिलता है और समाज के लिए भी हितकारी सिद्ध होता है | यानी जो वस्तु अपनी इच्छा से किसी को देकर वापस न ली जाये , और  साथ ही जिसे दी जा राही है उसके भी काम आये , वही सही अर्थो में दान है | भारतीय परंपरा में दान को कर्तव्य और धर्म दोनों ही माना जाता है | यही कारण है की दान की महिमा को हमारी सभ्यता में बड़े ही धार्मिक और सात्विक रूप में स्वीकार किया गया है | इसे बहुत कल्याणकारी कर्म माना गया है , क्योकि इससे त्याग करने की क्षमता बढती है | धर्मग्रंथो में बताया गया है की हर व्यक्ति को अपनी कमाई का एक नियत भाग जरुरतमंदो को दान करना ही चाहिए | त्याग का यह भाव हमें सावर्जनिक जीवन से जोड़कर सर्वे भवन्तु सुखिन :     की सोच की और मोड़ता है | इसलिए दान में अन्न , जल , वस्त्र , धन -  धान्य , शिक्षा , गाय – बेल आदि दिए जाने की रीती है दान की परंपरा का आधार ही यह सोच है की दान से अगर किसी जरूरतमंद को लाभ मिलता है तो यह सम्पूर्ण समाज के लिए लाभकारी है इसलिए सही मायनो में देखा जाये तो दान एक सामाजिक व्यवस्था है | ज्जिसे आध्यात्मिक भूमि पर समाज में संतुलन बनाने के उदेश्य से ही खड़ा किया होगा | यही कारण है की दान किसे दिया जाये , यह भी एक बड़ा सवाल है | जिस व्यक्ति को दान दिया जाता है उस व्यक्ति को दान का पात्र कहते है | दान सुपात्र को ही दिया जाये , यह बात हमारे धर्मग्रंथो में तो वर्णित है ही , एक वयाव्हारिक विचार भी है | यानी कोई प्यासा है , उसे आप पानी पिलाये तो वह ज्यादा पुण्य का कार्य है | बजाय इसके की आप किसी विशेष तिथि या अवसर की प्रतीक्षा करे और उस दिन पुण्यलाभ के उदेश्य से किसी को अत्यंत बहुमूल्य वास्तु दान करे | ठीक इसी तरह भूके इंसान को रोटी देकर जो पुण्य मिलेगा वह चमक – धमक से भरे किसी बड़े आयोजन में सेकड़ो – हजारो लोगो को इकठा कर भोजन करवाने से नहीं मिल सकता | अनाथ बच्चो को सहारा देना जैसे कार्य भी दान ही है | अभावग्रस्त जीवन जी रहे ऐसे लोग ही दान के सुपात्र भी है |

दिए गए दान से अभावो से जूझते जीवन को रौशनी की किरण मिले , इससे बेहतर क्या हो सकता है | 

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Wednesday, 17 June 2015

कैसे जलाये रखें अपने अन्दर की चिंगारी को ?

Posted by- radiateashok
कैसे जलाये रखें अपने अन्दर की चिंगारी को ?


Good Morning everyone ,  मुझे  यहाँ  बोलने  का  मौका   देने  के  लिए  आप  सभी  का  धन्यवाद . ये  दिन  आपके  बारे  में  है . आप , जो  कि  अपने  घर  के  आराम ( और  कुछ  cases में  दिक्कतों ) को  छोड़  के  इस  college में  आए  हैं  ताकि  ज़िन्दगी  में  आप  कुछ  बन  सकें . मैं  sure हूँ  कि  आप  excited हैं . ज़िन्दगी  में  ऐसे  कुछ  ही  दिन  होते  हैं  जब  इंसान  सच -मुच बहुत  खुश  होता  है . College का  पहला  दिन  उन्ही  में  से  एक  है .जब   आज   आप   तैयार  हो  रहे  थे , आपके  पेट  में  हलचल सी हुई होगी . Auditorium कैसा  होगा , teachers कैसे  होंगे , मेरे  नए  classmates कौन  होंगे इतना  कुछ  है  curious होने  के  लिए . . मैं  इसे  excitement कहता  हूँ , आपके  अन्दर  कि  चिंगारी  (spark) जो  आपको  एकदम  जिंदादिल  feel कराती  है . आज  मैं  आपसे  इस  चिंगारी  को  जलाये  रखने  के  बारे  में  बात  करने  आया  हूँ . या  दुसरे  शब्दों  में  हम  अगर  हमेशा  नहीं  तो   ज्यादा  से  ज्यादा  समय  कैसे  खुश  रह  सकते  हैं ?
इस  चिंगारी  कि  शुरआत कहाँ  से  होती  है ? मुझे  लगता  है  हम  इसके  साथ  पैदा  होते  हैं .  मेरे   3 साल  के  जुड़वाँ  बच्चों  में  million sparks हैं . वो  Spiderman का  एक  छोटा  सा  खिलौना  देख  के  बिस्तर  से  कूद  पड़ते  हैं .  Park में  झूला  झूल  के  वो  thrilled हो  जाते  हैं . पापा  से  एक  कहानी  सुनके  उनमे  उत्तेजना  भर  जाती  है . अपना  Birthday आने  के  महीनो  पहले  से  वो  उलटी  गिनती  करना  शुरू   कर  देते  हैं  कि  उस  दिन  cake काटने  को  मिलेगा .
मैं  आप  जैसे  students को  देखता  हूँ  और  मुझे  आपके  अन्दर   भी  कुछ  spark नज़र  आता  है . पर  जब  मैं  और  बड़े  लोगों  को  देखता  हूँ  तो  वो  मुश्किल  से  ही  नज़र  आता  है . इसका  मतलब  , जैसे -जैसे  हमारी  उम्र  बढती  है  , spark कम  होते  जाते   हैं . ऐसे  लोग  जिनमे  ये  चिंगारी  बिलकुल  ही  ख़तम   हो  जाती  है  वो  मायूस , लक्ष्यरहित और  कडवे  हो  जाते  हैं . Jab We met के  पहले  half की  करीना  और  दुसरे  half की   Kareena याद  है  ना ? चिंगारी  बुझ  जाने  पे  यही  होता  है . तो  भला  इस  Spark को  बचाएँ  कैसे ?
Spark को  दिए  की  लौ  की  तरह  imagine कीजिये . सबसे  पहले  उसे  nurture करने  ki ज़रुरत  है उसे  लगातार  इंधन  देने   की  ज़रुरत  है . दूसरा , उसे  आन्धी -तूफ़ान  से  बचाने  की  ज़रुरत  है .
Nurture करने  के   लिए हमेशा  लक्ष्य  बनाएं .यह  इंसान  कि  प्रवित्ति  होती  है  कि  वह  कोशिश  करे , सुधार  लाये  और  जो  best achieve कर  सकता  है  उसे  achieve करे .  दरअसल  इसी  को  Success कहते  हैं . यह  वो  है  जो  आपके  लिए  संभव  है . ये  कोई  बाहरी   माप -दंड  नहीं  है जैसे  company द्वारा  दिया  गया  Package, कोई  car या  कोई  घर .
हममे  से  ज्यदातर  लोग  middle-class family से   हैं . हमारे  लिए   , भौतिक  सुख -सुविधाएं  सफलता  की  सूचक  होती  हैं , और  सही भी  है . जब  आप  बड़े  हो  जाते  हैं  और  पसिया  रोज़ -मर्रा  कि  ज़रूरतों  को  पूरा  करने  के  लिए  ज़रूरी  हो जाता  है , तो  ऐसे  में  financial freedom होना  एक  बड़ी  achievement है .
लेकिन   यह  ज़िन्दगी  का  मकसद  नहीं  है .  अगर  ऐसा  होता  तो  Mr. Ambani काम  पर  नहीं  जाते .Shah Rukh Khan घर  रहते  और  और -ज्यादा  dance नहीं  करते . Steve Jobs और  भी  अच्छा  iPhone बनाने  के  लिए  मेहनत  नहीं  करते  , क्योंकि  Pixar बेच  कर   already उन्हें  कई  billion dollars मिल  चुके  हैं .  वो  ऐसा  क्यों  करते  हैं ? ऐसा  क्या  है  जो  हर  रोज़  उन्हें  काम  पर  ले  जाता  है ?
वो  ऐसा  इसलिए  करते  हैं  क्योंकि  ये  उन्हें  ख़ुशी  देता  है . वो  ऐसा  इसलिए  करते  हैं  क्योंकि  ये  उन्हें  जिंदादिली  का  एहसास  करता  है . अपने  मौजूदा  स्तर  में  सुधार  लाना  एक  अच्छा  अहसास  दिलाता  है . अगर  आप  मेहनत  से  पढ़ें  तो  आप  अपनी  rank सुधार  सकते  हैं . अगर  आप  लोगों  से  interact करने  का  प्रयत्न  करें  तो  आप  interview में  अच्छा  करेंगे . अगर  आप  practice करें  तो  आपके  cricket में  सुधार  आएगा . शायद  आप  ये  भी  जानते  हों कि  आप  अभी  Tendulkar नहीं  बन  सकते  , लेकिन  आप  अगले  स्तर  पर   जा  सकते  हैं . अगले  level पे  जाने  के  लिए  प्रयास  करना ज़रूरी  है .
प्रकृति   ने  हमें   अनेकों  genes के  संयोग  और  विभिन्न  परिस्थितियों  के  हिसाब  से  design किया  है .खुश  रहने  के  लिए  हमें  इसे  accept करना  होगा , और  प्रकृति  कि  इस  design का अधिक  से  अधिक  लाभ  उठाना  होगा . ऐसा  करने  में  Goals आपकी  मदद  करेंगे .
अपने  लिए  सिर्फ  career या  academic goals ही  ना  बनाएं . ऐसे  goals बनाएं  जो  आपको  एक balanced और  successful life दे . अपने  break-up के  दिन  promotion पाने  का  कोई  मतलब  नहीं  है . कार  चलाने  में  कोई  मज़ा   नहीं  है  अगर  आपके  पीठ में दर्द हो .दिमाग  tension से  भरा  हो  तो भला  shopping करने  में  क्या  ख़ुशी होगी ?
आपने  ज़रूर  कुछ  quotes पढ़े  होंगे  —  ज़िन्दगी  एक  कठिन  race है , ये  एक  marathon है  या  कुछ  और . नहीं , जो  मैंने  आज  तक  देखा  है  ज़िन्दगी  nursery schools में  होने  वाली  उस  race की  तरह  है  जिसमे  आप  चम्मच  में  रखे  मार्बल  को  अपने  मुंह  में  दबा  कर  दौड़ते  हैं . अगर  मार्बल  गिर  जाये  तो  दौड़  में  first आने  का  कोई  अर्थ  नहीं  है . ऐसा  ही  ज़िन्दगी  के  साथ  है  जहाँ  सेहत  और  रिश्ते  उस  मार्बल  का  प्रतीक  हैं . आपका  प्रयास  तभी  सार्थक  है  जब   तक  वो   आपके  जीवन  में  सामंजस्य  लाता  है .नहीं  तो , आप  भले  ही  सफल  हो  जायें , लेकिन  ये  चिंगारी , ये  excited और  जिंदा  होने  की  feeling धीरे धीरे  मरने  लगेगी . …..
Spark को  nurture करने  के  बारे  में  एक  आखिरी  चीज ज़िन्दगी  को  संजीदगी  से  ना  लें ….don’t take life seriously. मेरे  एक  योगा  teacher class के  दौरान  students को  हंसाते  थे . एक  student ने  पूछा  कि  क्या  इन  Jokes कि  वजह  से  योगा   practice का  समय  व्यर्थ  नहीं  होता ? तब  teacher ने  कहा  – Don’t be serious be sincere. तबसे  इस  Quote ने  मेरा  काम  define किया  है . चाहे  वो  मेरा  लेखन  हो , मेरी  नौकरी  हो , मेरे  रिश्ते  हों  या  कोई  और  लक्ष्य . मुझे  अपनी  writings पर  रोज़  हज़ारों  लोगों  के  opinions मिलते  हैं . कहीं  खूब  प्रशंशा  होती  है  कहीं  खूब  आलोचना . अगर  मैं  इन  सबको  seriously ले  लूं , तो  लिखूंगा  कैसे ? या  फिर  , जीऊंगा  कैसे ?ज़िन्दगी  गंभीरता  से  लेने  के  लिए  नहीं  है , हम  सब  यहाँ  temporary हैं .हम  सब  एक  pre-paid card की  तरह  हैं  जिसकी  limited validity hai. अगर  हम  भाग्यशाली  हैं  तो  शयद  हम   अगले  पचास  साल  और  जी  लें . और  50 साल  यानि सिर्फ  2500 weekends .क्या  हमें  सच -मुच  अपने  आप  को  काम  में  डुबो  देना  चाहिए ? कुछ  classes bunk करना , कुछ  papers में  कम  score करना  , कुछ  interviews ना  निकाल  पाना , काम  से  छुट्टी  लेना , प्यार   में  पड़ना , spouse से  छोटे -मोटे  झगडे  होना सब  ठीक  है हम  सभी  इंसान  हैं , programmed devices नहीं ….
मैंने  आपसे  तीन  चीजें  बतायीं – reasonable goals, balance aur ज़िन्दगी  को  बहुत  seriously नहीं  लेना जो  spark को  nurture करेंगी .  लेकिन  ज़िन्दगी  में  चार  बड़े  तूफ़ान  आपके  दिए  को  बुझाने  की  कोशिश  करेंगे . इनसे  बचने  बहुत  ज़रूरी  है . ये  हैं  निराशा  (disappointment),कुंठा ( frustration),  अन्याय (unfairness) और जीवन में कोई उद्देश्य ना होना (loneliness of purpose.)
निराशा  तब  होगी  जब  आपके  प्रयत्न  आपको  मनचाहा  result ना  दे  पाएं  . जब  चीजें  आपके  प्लान  के  मुताबिक  ना  हों  या  जब  आप  असफल  हो जायें . Failure को  handle करना  बहुत  कठिन  है , लेकिन  जो  कर  ले  जाता  है  wo और  भी  मजबूत  हो  कर  निकलता  है . इस  failure से  मुझे  क्या  सीख  मिली इस  प्रश्न  को  खुद  से  पूछना  चाहिए . आप  बहुत  असहाय  feel करेंगे   , आप  सबकुछ  छोड़  देना  चाहेंगे  जैसा  कि  मैंने  चाहा   था  , जब  मेरी  पहली  book को  9 publishers ने  reject कर  दिया  था . कुछ  IITians low-grades की  वजह  से  खुद  को  ख़तम कर  लेते  हैं , ये  कितनी  बड़ी   बेवकूफी  है ? पर  इस  बात  को  समझा  जा  सकता  है  कि  failure आपको  किस  हद्द  तक  hurt कर  सकता  है .
पर ये ज़िन्दगी है . अगर चुनौतियों  से हमेशा पार पाया जा सकता तो , तो चुनौतियाँ चुनौतियाँ नहीं रह जातीं. और याद रखिये अगर आप किसी चीज में fail हो रहे हैं,तो इसका मतलब आप अपनी सीमा या क्षमता तक पहुँच रहे हैं. और यहीं आप होना चाहते हैं.
Disappointment का भाई है  frustration, दूसरा तूफ़ान . क्या आप कभी frustrate  हुए हैं? ये तब होता है जब चीजें अटक जाती हैं. यह भारत में विशेष रूप से प्रासंगिक है. ट्राफिक जाम से से लेकर अपने योग्य job पाने तक. कभी-कभी चीजें इतना वक़्त लेती हैं कि आपको पता नहीं चलता की आपने अपने लिए सही लक्ष्य निर्धारित किये हैं.Books लिखने के बाद, मैंने bollywood के लिखने का लक्ष्य बनाया, मुझे लगा उन्हें writers  की ज़रुरत है. मुझे लोग बहुत भाग्यशाली मानते हैं पर मुझे अपनी पहली movie release  के करीब पहुँचने में पांच साल लग गए.
Frustration excitement  को ख़त्म करता है, और आपकी उर्जा को नकारात्मकता में बदल देता है, और आपको कडवा बना देती है.मैं इससे कैसे deal  करता हूँ? लगने वाले समय का realistic अनुमान लगा के. . भले ही movie  देखने में कम समय लगता हो पर उसे बनाने में काफी समय लगता है, end-result  के बजाय उस result तक पहुँचने के  प्रोसेस को एन्जॉय करना , मैं कम से कम script-writing तो सीख रहा था , और बतौर एक  side-plan  मेरे पास अपनी तीसरी किताब लिखने को भी थी और इसके आलावा दोस्त, खाना-पीना, घूमना ये सब कुछ frustration से पार पाने में मदद करती हैं. याद रखिये, किसी भी चीज को  seriously  नहीं लेना है.Frustration  , कहीं ना कहीं एक इशारा है कि आप चीजों को बहुत seriously ले रहे हैं.Frustration excitement को  ख़तम  करता  है , और  आपकी  energy को  negativity में  बदल  देता  है , वो  आपको  कडवा  बना  देता  है . मैं  इससे  कैसे  deal करता  हूँ ?
Unfairness ( अन्याय ) – इससे  deal करना  सबसे  मुश्किल  है , लेकिन  दुर्भाग्य  से  अपने  देश  में  ऐसे  ही  काम  होता  है . जिनके  connections होते  हैं , बड़े  बाप  होते  हैं , खूबसूरत  चेहरे  होते  हैं ,वंशावली  ( pedigree) होती  है , उन्हें   सिर्फ  Bollywood में  ही  नहीं  बल्कि  हर  जगह  आसानी  होती  है . और  कभी -कभी  यह  महज  luck की  बात  होती  है . India में  बहुत  कम   opportunities हैं , इसलिए   कुछ  होने  के  लिए  सारे  गृह -नक्षत्रों  को  सही  इस्थिति  में  होना   होगा . Short-term में  मिलने  वाली  उपलब्धियां  भले  ही  आपकी   merit और  hard –work  के  हिसाब  से   ना  हों  पर  long-term में  ये   ज़रूर  उस  हिसाब  से  होंगी , अंततः   चीजें  work-out करती  हैं . पर  इस  बात  को  समझिये  कि  कुछ  लोग  आपसे  lucky होंगे .
दरअसल  अगर  Indian standards के  हिसाब  से  देखा  जाये  तो  आपको  College में  पढने  का  अवसर  मिलना  , और  आपके  अन्दर  इस  भाषण  को  English में  समझने  की   काबिलियत  होना  आपको  काफी  lucky बनता  है . हमारे  पास  जो  है  हमें  उसके  लिए  अहसानमंद  होना  चाहिए  , और  जो  नहीं  है  उसे  accept करने  कि  शक्ति  होनी  चाहिए .  मुझे  अपने  readers से  इतना  प्यार  मिलता  है  कि  दुसरे  writers उसके  बारे  में  सोच  भी  नहीं  सकते . पर  मुझे  साहित्यिक प्रशंशा  नहीं  मिलती  है . मैं  Aishwarya Rai की  तरह  नहीं  दीखता  हूँ  पर  मैं  समझता  हूँ   कि   मेरे  दोनों  बेटे   उनसे  ज्यादा  खूबसूरत  हैं . It is OK . Unfairness को  अपने  अन्दर  कि  चिंगारी  को  बुझाने  मत  दीजिये .
और  आखिरी  चीज  जो  आपके  spark को  ख़तम  कर  सकती  है  वो  है  Isolation( अलग होने की स्थिति )आप  जैसे  जैसे  बड़े   होंगे  आपको  realize होगा  कि  आप  unique हैं . जब  आप  छोटे  होते  हैं  तो  सभी  को  ice-cream और  spiderman अच्छे  लगते  हैं . जब  आप  college में  जाते  हैं  तो  भी  आप  बहुत  हद  तक  अपने   बाकी  दोस्तों  की  तरह  ही  होते  हैं . लेकिन  दस  साल  बाद  आपको  पता  लगता  है  कि  आप   unique हैं . आप  जो  चाहते  हैं , आप  जिस  चीज  में  विश्वास  राखते  हैं , वो  आपके  सबसे  करीबी  लोगों  से  भी  अलग  हो  सकती  है . इस  वजह  से  conflict हो  सकती  है  क्योंकि  आपके  goals दूसरों  से  match नहीं  करते . और  आप  शायद   उनमे  से  कुछ  को  drop कर  दें . College में  Basketball के  कप्तान  रह  चुके , दूसरा  बछा  होते -होते  ये  खेल  खेलना  छोड़  देते  हैं . जो चीज  उन्हें  इतनी  पसंद  थी  वो  उसे  छोड़  देते  हैं . ऐसा  वो  अपनी  family के  लिए  करते  हैं . पर  ऐसा  करने   में  Spark ख़तम  हो  जाता  है . कभी  भी  ऐसा  compromise ना  करें . पहले  खुद   को  प्यार  करें  फिर  दूसरों  को .
मैंने  आपको  चारों  thunderstorms – disappointment, frustration, unfairness and isolation के  बारे  में  बताया . आप  इनको  avoid नहीं  कर  सकते , मानसून  की  तरह  ये  भी  आपके  जीवें  में  बार -बार  आते  रहेंगे . आपको  बस  अपना  raincoat तैयार  रखना  है  ताकि  आपके  अन्दर  कि  चिंगारी  बुझने  ना  पाए .
मैं  एक  बार  फिर  आपका  आपके  जीवन  के  सबसे  अच्छे समय  में  स्वागत  करता  हूँ . अगर  कोई  मुझे  समय  में  वापस  जाने  का  option दे  तो  निश्चित  रूप  से  मैं  college वापस  जाना  चाहूँगा . मैं  ये आशा  करता  हुनक  की  दस  साल  बाद  भी  , आपकी  आँखों  में  वही  चमक  होगी  जो  आज  है , कि  आप  अपने  अन्दर  की  चिंगारी  को  सिर्फ  college में  ही  नहीं  बल्कि  अगले  2500 weekends तक  ज़िन्दा  रखेंगे . और  मैं  आशा करता  हूँ  की  सिर्फ  आप  ही  नहीं  बल्कि  पूरा  देश  इस  चिंगारी  को  ज़िन्दा  रखेगा , क्योंकि  इतिहास  में  किसी  भी  और  पल  से  ज्यादा  अब  इसकी  ज़रुरत  है . और  ये  कहना  कितना   अच्छा लगेगा कि मैं  Billion Sparks की भूमि से वास्ता रखता हूँ .

 Thank You.

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